
श्री के. एन. गोविंदाचार्य (कोड़ीपकम् नीलमेघाचार्य गोविंदाचार्य) जी का जन्म 02 मई 1944 को पवित्र नगरी तिरुपति में हुआ | कुछ समय पश्चात उनके माता पिता वाराणसी (उ.प्र.) आ गए | गोविंदाचार्य जी की शिक्षा दीक्षा वाराणसी में ही हुई | 1962 में आपने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एमएससी किया | छात्र जीवन से ही सदैव सामाजिक कार्यों से आपकी संलग्नता रही | देश के महत्वपूर्ण और कई बड़े सामाजिक संगठनो में रहकर प्रत्यक्ष रूप में आपने कार्य किया | लम्बे कालखंड में आप आरएसएस के प्रचारक भी रहे | सन 1974 में जयप्रकाश नारायण के साथ जुड़ कर सम्पूर्ण क्रांति का नारा दिया था | आपने जय प्रकाश नारायण जी के आंदोलन में बड़ी भूमिका निभायी थी | स्वयं को चुनावी राजनीती से दूर रख कर जीवन भर राष्ट्र की सेवा का काम संगठनात्मक तौर पर करने का व्रत लिया | "व्यवस्था परिवर्तन" की वास्तविक सोच और समझ के साथ उसे राजनीतिक, सामाजिक मार्ग से पूर्ण करने का रास्ता भी आपके द्वारा ही प्रथमतः प्रशश्त किया गया | इसी के परिणाम स्वरुप देश आपको महान राष्ट्रीय विचारक के रूप में स्वीकार करता है | वर्ष 2000 तक विभिन्न रूपों में कई सामाजिक, राजनैतिक संगठनो के साथ काम करने के पश्चात आपने वैश्वीकरण के प्रभावों को गहराई से समझने के लिए अध्ययन अवकाश लिया | अपने अध्ययन के पश्चात आप इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारतीय परिपेक्ष्य में राज्य की अपनी प्रभाव शक्ति जरूर है लेकिन देश के विकास में सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत की भी अहम भूमिका है | इसलिए भारत के चहुमुखी विकास के लिए बौद्धिक, रचनात्मक, और आंदोलनात्मक कार्यों की त्रिवेणी के साथ राजनीति के क्षेत्र में कार्य किया जाना भी आवश्यक है | इस विश्वास के साथ श्री के. एन. गोविंदाचार्य राष्ट्र के पुनरुत्थान और व्यवस्था परिवर्तन के कार्य में जुटे हैं |


















